
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से समाजवादी पार्टी के बेबाक और तेज-तर्रार विधायक सुधाकर सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान 67 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। घटना की खबर जैसे ही घोसी पहुंची—पूरा इलाका सदमे में डूब गया।
17 नवंबर को दिल्ली में उमर अंसारी के रिसेप्शन से लौटने के बाद उनकी सेहत अचानक बिगड़ गई थी। उसी समय से वे अस्पताल में भर्ती थे। गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
घोसी में उमड़े समर्थक: आखिरी विदाई की तैयारी शुरू
सुधाकर सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव घोसी में होगा। उनके परिवार में पत्नी और पुत्र डॉ. सुजीत सिंह हैं।
गांव में भीड़ जुट रही है—नेता, कार्यकर्ता, समर्थक… सभी एक ऐसी शख्सियत को विदाई देने पहुंचे हैं, जिसे घोसी का जुझारू सिपाही कहा जाता था।
सपा ने X पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा— “ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे, परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।”
टिकट कटे तो लड़ गए, और जीते भी!
सुधाकर सिंह का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं।

- पहली जीत नत्थूपुर (अब मधुबन) से मिली
- बाद में दो बार घोसी के MLA बने
- 2022 में SP ने आखिरी समय में टिकट दारा सिंह चौहान को दे दिया
- सुधाकर सिंह ने टिकट कटने पर कहा: “ठीक है, हम भी मैदान में उतरते हैं!”
- उन्होंने निर्दलीय लड़ाई लड़ी, हालांकि हार गए
लेकिन 2023 के उपचुनाव में उन्होंने शानदार रिवेंज लिया— दारा सिंह चौहान को हराकर SP को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह जीत इतनी बड़ी थी कि पूरे यूपी की राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई।
तेज तर्रार + बेबाक = सुधाकर सिंह
वो उन नेताओं में से थे जो जनता की समस्या पर सीधे अफसरों को घेर लेते थे। बेधड़क, बिना स्क्रिप्ट, बिना डर— इसी स्वभाव के कारण उन पर कई केस भी हुए, पर जनता ने हमेशा उन्हें अपना नेता माना। बेबाक अंदाज़ उनका ट्रेडमार्क था— और शायद इसी वजह से वे ‘घोसी के रियल फाइटर’ कहलाते थे।
जाते-जाते भी छोड़ गए एक सवाल…
घोसी में अब सियासी समीकरण क्या होंगे? SP के लिए यह बड़ा खालीपन है, और BJP के लिए बड़ा राजनीतिक स्पेस। उपचुनाव लगभग तय है। लेकिन सुधाकर सिंह जैसा जमीनी नेता दोबारा मिलना मुश्किल है।
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